Tuesday, January 20, 2015

संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने किया केबीनेट के फैसले का स्वागत

संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने किया केबीनेट के फैसले का स्वागत

भोपाल। म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने आज शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट के द्वारा लिये गये इस निर्णय का स्वागत करते हुये कहा है कि, संविदा कर्मचारियों के लिए यह अहम् फैसला है जिससे प्रदेश में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को प्रतिवर्ष बढ़ने वाले संविदा के लिए बार-बार आदेश जारी नहीं करना पड़ेगा, अपने आप संविदा कर्मचारियों की संविदा बढ़ जायेगी। 

जिससे संविदा कर्मचारियों का होने वाला शोषण बंद होगा। अभी संविदा कर्मचारियों की संविदा बढ़ाने के के नाम पर संविदा कर्मचारियों से एक-एक माह का वेतन मांगा जाता था और अनेक अनुचित मांग की जाती थी और संविदा कर्मचारी अच्छे काम करने के वावजूद अधिकारियों की चमचागिरी और जी हजुरी और उनकी चाकरी करते थे।

शिवराज सिंह चौहान के इस कैबिनेट के निर्णय से लाखों संविदा कर्मचारियों को शोषण से मुक्ति मिलेगी म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने शिवराज सिंह चौहान केबिनेट के इस निर्णय का स्वागत करते हुये आभार व्यक्त किया है।

संविदा कर्मचारियों के लिए बदले नियम

संविदा कर्मचारियों के लिए बदले नियम

भोपाल। शिवराज सरकार की केबीनेट मीटिंग में मध्यप्रदेश में कार्यरत करीब 5 लाख संविदा कर्मचारियों के लिए नियुक्ति नियम बदल दिए गए हैं। यह संविदा कर्मचारियों के हित में कहे जा सकते हैं, परंतु पीएफ के बारे में अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है।

शिवराज केबीनेट ने तय किया है कि संविदा कर्मचारियों को अब बार बार नियुक्ति पत्र नहीं दिए जाएंगे, एक बार नियुक्ति हो जाने के बाद यह लगातार जारी रहेगी। जब उनकी से​वाएं समाप्त की जाएंगी तभी कोई आदेश जारी किया जाएगा। हर अवधि के लिए एक नया नियुक्ति आदेश जारी नहीं किया जाएगा। संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति आॅटो रिनुअल मोड में रहेंगी।

Monday, January 19, 2015

मप्र के 3 लाख कर्मचारियों का नहीं कटता PF

मप्र के 3 लाख कर्मचारियों का नहीं कटता PF

भोपाल। आंनगवाड़ी कार्यकर्ता, होमगार्ड के सैनिक, ग्राम सहायक, रोगी कल्याण समिति के कर्मचारी एवं तमाम संविदा कर्मचारियों सहित मप्र शासन से वेतन प्राप्त कर रहे लगभग 3 लाख कर्मचारी ऐसे हैं, जिनका पीएफ नहीं काटा जाता। जबकि सख्त नियम है कि प्रत्येक कर्मचारी का पीएफ काटा जाना चाहिए। जिसमें 12 प्रतिशत कर्मचारी और 12 प्रतिशत सरकार की ओर से उसके खाते में जमा होना चाहिए। 

प्रदेश के सरकारी महकमों में वर्षों से काम कर रहे लाखों कर्मचारियों का प्रोविडेंट फंड नहीं काटे जाने की लगातार शिकायतें मिल रही है। जनता की सुरक्षा में लगे होमगार्ड के 16 हजार सैनिक, 20 हजार से ज्यादा ग्राम सहायक, रोगी कल्याण समितियों के अधीन कार्यरत लैब तथा एक्सरे मशीन टेकनीशियनों, सहकारी सोसाइटियों में कार्यरत कर्मचारियों को भी इससे वंचित रखा गया हैं और इनकी भी संख्या प्रदेश में हजारों की तादात में हैं। 

राज्य सरकार के आधा दर्जन से ज्यादा विभागों में संविदा, पार्ट टाइम जॉब, मानदेय और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में काम कर रहे तीन लाख से अधिक कर्मचारियों का प्रोविडेंट फंड (पीएफ) नहीं काटने वाले विभाग के मुखिया की सैलरी अब अटैच करने की तैयारी है। 

केन्द्रीय भविष्य निधि संगठन के प्रदेश कमिश्नर अश्विनी गुप्ता ने अधिकांश विभागों के अफसरों को नोटिस जारी करते हुए कर्मचारियों का पीएफ नहीं काटने वाले अफसरों को चेताया है। केन्द्र सरकार के श्रम नियमों के तहत किसी भी सरकारी तथा गैर सरकारी संस्था में पार्ट टाइम अथवा फुल टाइम नौकरी करने वाले कर्मचारी का प्रोविडेंट फंड काटा जाना अनिवार्य है, मगर प्रदेश के सरकारी विभागों में ही इस नियम का उल्लंघन धड़ल्ले से हो रहा है। 

जिन कर्मियों का पीएफ नहीं काटा जाता उनमें महिला एवं बाल विकास 40 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा 40 हजार सहायिका, स्कूल शिक्षा विभाग में ऐसे ढाई लाख से अधिक संविदा शाला शिक्षक, प्राध्यापक, गुरूजी, प्रौढ़ शिक्षा अध्यापक शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग में एनआरएचएम के तहत परियोजना अधिकारी, संविदा कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता, एनएम सहित आयुष में भी लगभग 50 हजार कर्मचारी रखे गए हैं, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण में पंचायत स्तर पर 50 हजार मेट एवं 23 हजार ग्राम पंचायत सचिव तथा मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए लगभग 76 हजार कर्मचारियों को मानदेय पर लगाया है। इसी तरह पुलिस का सहयोगी संगठन होमगार्ड के 16 हजार 305 सैनिकों सहित 350 महिला नगर सैनिक, 20 हजार ग्राम सहायकों के प्रोविडेंट फंड नहीं काटने की शिकायतें मिली हैं।

वेतन का 12 प्रतिशत काटने का प्रावधान
विभिन्न सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाओं में मानदेय अथवा वेतनभोगी के रूप में रखे गए कर्मचारियों के वेतन से 12 प्रतिशत तथा संस्थान द्वारा स्वयं 12 प्रतिशत राशि पीएफ फण्ड में मिलाने का नियम हैं। उक्त राशि कर्मचारी के रिटायर होने पर अंशदान के रूप में कर्मचारी को वापस मिलती है।

वित्त विभाग के कर्मचारियों को दोहरा वेतनमान

वित्त विभाग के कर्मचारियों को दोहरा वेतनमान

भोपाल। खाली खजाने के नाम पर बार बार टैक्स बढ़ाने वाले वित्त विभाग के अधिकारी/कर्मचारी खुद खजाने को चूना लगा रहे हैं। दूसरे कर्मचारियों की वेतनवृद्धि की अनुशंसाओं पर नेगेटिव टिप्पणी कर रहे हैं परंतु खुद दोहरे वेतनमान का लाभ ले रहे हैं। जबकि नियमानुसार किसी भी विभाग में दोनों में से केवल एक योजना लागू रह सकती है। आप इसे संस्थागत/संगठित भ्रष्टाचार भी कह सकते हैं। 

दरअसल, राज्य सरकार ने एक अप्रैल 2006 से क्रमोन्न्ति को समाप्त कर समयमान-वेतनमान योजना को लागू किया था लेकिन विशिष्ट सेवा वाले विभागों में शामिल वित्त, राज्य प्रशासनिक सेवा और राज्य पुलिस सेवा में इस योजना को यथावत इस शर्त पर रखा कि यदि विभाग समयमान-वेतनमान का लाभ लेना चाहते हैं तो उन्हें कैबिनेट में प्रस्ताव मंजूर करवाना होगा।

इसमें यह भी स्पष्ट किया गया था कि समयमान-वेतनमान लागू करने पर संबंधित विभाग को क्रमोन्न्ति योजना समाप्त करनी होगी। वित्त विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव जीपी सिंघल ने वर्ष 2009 में कैबिनेट में प्रस्ताव ले जाकर विभाग में समयमान-वेतनमान को लागू करवा लिया, लेकिन क्रमोन्न्ति योजना को समाप्त नहीं किया।

इसके चलते विभाग के अधिकारी दोहरे वेतनमान का लाभ उठा रहे हैं। जिन अधिकारियों ने पहले क्रमोन्‍नति का लाभ ले लिया था, वर्ष 2012 में पद बढ़ने के बाद वे अब समयमान-वेतनमान का लाभ ले रहे हैं। जबकि सभी विभागों में केवल समयमान-वेतनमान योजना ही लागू है।

एक नजर में
- क्रमोन्‍नति योजना में 6 साल की सेवा के बाद वरिष्ठ श्रेणी वेतनमान और 10 साल की सेवा के बाद प्रवर श्रेणी वेतनमान मिलता है।
- समयमान-वेतनमान में द्वितीय श्रेणी को 10 साल की सेवा पर वरिष्ठ और 20 साल की सेवा पर प्रवर श्रेणी वेतनमान मिलता है। वहीं तृतीय और चतुर्थ श्रेणी को 8 साल पर वरिष्ठ और 16 साल की सेवा पर प्रवर श्रेणी वेतनमान मिलता है।

इनका कहना है
विभाग में दो वेतनमान लागू होने की बात मेरे संज्ञान में आई है। मैं पूरे मामले का परीक्षण करवा रहा हूं, कहां क्या गड़बड़ है। जो भी उचित होगा, निर्णय लिया जाएगा।
अजय नाथ
अपर मुख्य सचिव वित्त

TAX के बारे में वित्तमंत्री के विचार

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि एनडीए सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए टैक्स की दरें ऊंची करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहेगी कि लोगों की जेब में अधिक से अधिक पैसा बचे, ताकि वे व्यय करें और आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहन मिलने में सफल हो।

उन्होंने बजट की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने का दावा करते हुए कहा कि लोगो को सरकार की वित्तीय स्थिति की वास्तविक सूचना उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जेटली ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले बजट में आयकर छूट की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये कर दी थी। जेटली अपना पहला पूर्ण बजट अगले महीने संसद में पेश करेंगे।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया में निवेशकों के सामने तमाम रास्ते खुले हैं। ऐसे में देश में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए एक ऐसी कर प्रणाली की आवश्यकता है जो प्रतिस्पर्धी, आक्रामकता से मुक्त और संतुलित हो। जेटली ने कहा कि शुरू में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए लोक व्यय बढाना आवश्यक है क्योंकि पिछली संप्रग सरकार के समय इसका बडा नुकसान हो चुका है।

उन्होंने एक के बाद एक राज्यों में निवेश आकर्षित करने के लिए आयोजित किए जा रहे सम्मेलनों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास के एजेंडा को पुन: रास्ते पर लाने में कामयाब हुए हैं। जेटली ने कहा कि निवेशक उन्हीं राज्यों में जाएंगे जहां कारोबार का वातावरण बढिय़ा होगा। उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और तृणमूल कांग्रेस शासित पश्चिम बंगाल में निवेशक सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं।

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